(महराजगंज) सिन्दुरियां थाना क्षेत्र के सिंदुरिया चौराहा, झनझनपुर, चिउटहां, बलूअहीं धूस समेत आसपास के बाजारों में बड़े किराना के थोक व्यापारियों द्वारा गुटखा उत्पादों को निर्धारित मूल्य से अधिक द...
(महराजगंज) सिन्दुरियां थाना क्षेत्र के सिंदुरिया चौराहा, झनझनपुर, चिउटहां, बलूअहीं धूस समेत आसपास के बाजारों में बड़े किराना के थोक व्यापारियों द्वारा गुटखा उत्पादों को निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बेचने का आरोप सामने आया है। स्थानीय दुकानदारों और उपभोक्ताओं का कहना है कि कई कंपनियों के गुटखा और पान मसाला जैसे कमला पसंद, 225 रू. पैकेट, शुद्ध प्लस 200 रू पैकेट,आरजू 85 रू पैकेट और विमल को प्रिंटेड कीमत से अधिक मूल्य पर बेचा जा रहा है, जिससे छोटे दुकानदारों और उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ बड़े थोक व्यापारी कंपनियों के उत्पादों का स्टॉक अपने पास रोककर रखते हैं और बाद में अधिक कीमत पर बेचते हैं। छोटे दुकानदारों का आरोप है कि जब वे निर्धारित दर पर माल देने की मांग करते हैं तो उनसे “टैक्स” या अन्य खर्चों के नाम पर अतिरिक्त पैसा लिया जाता है। यदि दुकानदार इस पर आपत्ति जताते हैं तो उन्हें यह कहकर माल देने से मना कर दिया जाता है कि स्टॉक उपलब्ध नहीं है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि इस स्थिति के कारण छोटे व्यापारियों को मजबूरी में महंगे दाम पर माल खरीदना पड़ता है और अंततः उपभोक्ताओं को भी अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। इससे बाजार में अनियमितता और मनमानी वसूली का माहौल बन गया है। जानकारों के अनुसार भारत में पैक किए गए उत्पादों पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) स्पष्ट रूप से अंकित होना अनिवार्य है और उसी कीमत पर बिक्री की जानी चाहिए। हाल ही में सरकार ने पान मसाला और इसी तरह के उत्पादों के पैकेट पर रिटेल सेल प्राइस (RSP) यानी एमआरपी अंकित करना अनिवार्य किया है ताकि उपभोक्ताओं को सही कीमत की जानकारी मिल सके और गलत वसूली पर रोक लगाई जा सके। क्षेत्र के लोगों और छोटे दुकानदारों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ऐसे बड़े व्यापारियों की जांच कर कार्रवाई की जाए जो कंपनियों द्वारा निर्धारित प्रिंट कीमत से अधिक मूल्य पर गुटखा और पान मसाला बेच रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो बाजार में मनमानी और कालाबाजारी बढ़ सकती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से यह भी अपील की है कि बाजारों में नियमित जांच अभियान चलाकर यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी व्यापारी निर्धारित एमआरपी से अधिक कीमत पर उत्पादों की बिक्री न करे और उपभोक्ताओं के साथ हो रही मनमानी वसूली पर रोक लगा सके।