महराजगंज। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने वाले ग्राम रोजगार सेवक आज खुद सरकारी उपेक्षा का दंश झेलने को मजबूर हैं। जनपद महराजगंज में कार्यरत लगभग 625 ग्राम रोजगार सेवकों को जुलाई...
महराजगंज। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने वाले ग्राम रोजगार सेवक आज खुद सरकारी उपेक्षा का दंश झेलने को मजबूर हैं। जनपद महराजगंज में कार्यरत लगभग 625 ग्राम रोजगार सेवकों को जुलाई 2025 से अब तक मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे वे गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं। ग्राम रोजगार सेवकों को मानदेय के रूप में मात्र 7788 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं, वह भी समय से न मिलने के कारण उनके सामने परिवार चलाने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। कई रोजगार सेवक कर्ज लेने को मजबूर हो चुके हैं, वहीं अनेक परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। बच्चों की पढ़ाई, इलाज, राशन, बिजली बिल और किराए जैसी बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं।
उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ, जिला इकाई महराजगंज द्वारा आयुक्त ग्राम विकास उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ को 8 अक्टूबर 2025 को मानदेय भुगतान को लेकर अनुरोध पत्र भेजा गया था, लेकिन आज तक उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। संघ का आरोप है कि सरकार लगातार ग्राम रोजगार सेवकों पर कार्यभार तो बढ़ा रही है, लेकिन उनके मानदेय के लिए न तो समय से बजट जारी किया जा रहा है और न ही कोई स्थायी एवं ठोस व्यवस्था की गई है। संघ के मिठौरा ब्लॉक अध्यक्ष राम आशीष पटेल ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब सरकार के हर महत्वपूर्ण अभियान की जिम्मेदारी ग्राम रोजगार सेवकों पर होती है, तो फिर उन्हें समय पर मानदेय क्यों नहीं दिया जा रहा। उन्होंने बताया कि ग्राम रोजगार सेवकों से मनरेगा, पीएम आवास, पंचायत चुनाव, आईजी स्टैक, फार्मर रजिस्ट्री सहित ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित लगभग सभी जनहितकारी योजनाओं का कार्य पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कराया जाता है, लेकिन बदले में महीनों से उन्हें मानदेय नहीं मिल रहा।
राम आशीष पटेल ने कहा कि ग्राम रोजगार सेवक सरकार की योजनाओं की रीढ़ हैं। यदि यही कर्मचारी आर्थिक रूप से टूट जाएंगे, तो गांवों में योजनाओं के क्रियान्वयन पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो ग्राम रोजगार सेवक आंदोलन के लिए विवश होंगे। इस संबंध में ग्राम रोजगार सेवक संघ ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संघ का कहना है कि ग्राम रोजगार सेवकों के मानदेय के लिए अलग से स्थायी बजट सुनिश्चित किया जाए और पांच माह से लंबित बकाया मानदेय का भुगतान अविलंब कराया जाए, ताकि कर्मचारियों को राहत मिल सके और वे निश्चिंत होकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।